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13 अरब डॉलर से अधिक निवेश, मेक इन इंडिया से मेक फॉर द वर्ल्ड की ओर बढ़ा कदम

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री इशिबा के नेतृत्व में भारत-जापान संबंधों का नया दौर शुरू हुआ है। दोनों देशों की साझेदारी अब केवल ‘मेक इन इंडिया’ तक सीमित नहीं रही, बल्कि ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है। बीते दो वर्षों में हुए 170 से अधिक समझौते और 13 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश इस भरोसे और मजबूत साझेदारी का प्रमाण हैं।

भारत के उद्योगों में जापानी विश्वास
जापान का निवेश भारत के कई अहम क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है—इस्पात, ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टरों में बड़े प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं। निप्पॉन स्टील ने गुजरात व आंध्र प्रदेश में संयंत्र विस्तार की योजना बनाई है। वहीं, सुजुकी और टोयोटा भारत के अलग-अलग राज्यों में नए प्लांट्स लगाकर उत्पादन क्षमता बढ़ा रहे हैं। इससे लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।

वैश्विक निर्यात का नया केंद्र
भारत-जापान के संयुक्त उपक्रम अब घरेलू उत्पादन को वैश्विक बाजार में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। भारत में निर्मित हाइब्रिड और ईवी वाहन अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व जैसे बाजारों में निर्यात होंगे। यह कदम भारत को “विनिर्माण हब” बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।

लघु उद्योगों और किसानों को सीधा लाभ
भारत-जापान सहयोग का सबसे बड़ा फायदा लघु और मध्यम उद्यमों (SMEs) और किसानों को मिल रहा है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और जापानी कंपनियों के साथ मिलकर देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसमें भारतीय SMEs को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।
इसी तरह, सोजित्ज कॉरपोरेशन और इंडियन ऑयल की साझेदारी से 30 बायोगैस संयंत्र स्थापित होंगे, जहां किसान कृषि अवशेष बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।

रक्षा और रणनीतिक सहयोग
बढ़ते क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत और जापान ने सैन्य सहयोग को भी नई दिशा दी है। तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास बढ़ाए जाएंगे और आधुनिक तकनीक आधारित सैन्य उपकरण विकसित किए जाएंगे। साथ ही, दोनों देशों ने खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद व संगठित अपराधों से मिलकर निपटने का भी संकल्प लिया।

सतत विकास और पर्यावरण पर जोर
ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने साझेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए संयुक्त क्रेडिट तंत्र पर सहमति बनी है, जो स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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